फिल्म ‘धाकड़’ ट्रेंड सेट करेगा : Divya Dutta

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अभिनेत्री दिव्या दत्ता धाकड़ में कंगना रनौत और अर्जुन रामपाल के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं। अभिनेत्री का कहना है कि उन्हें यकीन है कि जासूसी थ्रिलर एक ट्रेंड सेट करेगा। बुधवार को उनके चरित्र का परिचय देने वाला एक पोस्टर जारी किया गया।

अभिनेत्री को फिल्म में रोहिणी नाम के एक ‘इविल मास्टर ‘ के रूप में देखा जाएगा।

उन्होंने कहा, “जब मैंने अपने भाग को नैरेट किया तो, मैं बहुत एक्साइटेड हुई। ये कुछ ऐसा है, जो इससे पहले मैंने कभी नहीं किया। यह किरदार मेरे व्यक्तिगत व्यवहार से बिल्कुल अलग है। मैं अपने किरदार के बारे में अभी ज्यादा खुलासा नहीं कर सकती हूं, लेकिन मैं यह कह सकती हूं कि मेरे चरित्र की त्वचा में उतरने के लिए, रोहिणी ने मानसिक रूप से भी बहुत तैयारी की।

उन्होंने कहा, “मैं कंगना और अर्जुन के साथ काम करने की उम्मीद कर रही हूं और मैं वास्तव में एक महिला प्रधान एक्शन फिल्म का हिस्सा बनने के लिए तैयार हूं। मुझे यकीन है कि ‘धाकड़’ एक ट्रेंड सेट करेगी।

news source आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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