फीफा विश्व कप : 440 बार उपयोग में आया वीएआर, जानिए क्यों ?

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फीफा विश्व कप के अध्यक्ष गियानी इन्फैंटिनो ने शुक्रवार को रूस में खेले जा रहे विश्व कप को अब तक का सर्वश्रेष्ठ बताते हुए इसकी तारीफ की। समाचार एजेंसी एफे की रिपोर्ट के मुताबिक, इस विश्व कप का सबसे असरदार और परिणाम बदलने वाला पहलू वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) रहा है। वीएआर मैदान पर मौजूद रेफरी के फैसलों की समीक्षा करता है।

इन्फैंटिनो ने कहा कि अभी तक कुल 440 बार वीएआर उपयोग में लाया गया जिसमें से 62 मैचों में 19 रिव्यू शामिल है। इन्फैंटिनो ने कहा कि वीएआर के आने से ऑफ साइड गोल खत्म हो गए हैं।

फीफा अध्यक्ष ने यहां लुज्निीकी स्टेडियम में संवाददाता सम्मेलन में कहा, “दुनिया आगे बढ़ रही है। यह कल से आज बेहतर है। वीएआर फुटबाल को बदल ही नहीं रहा है ये फुटबाल को साफ भी कर रहा है। फुटबाल को और ईमानदार तथा पारदर्शी बना रहा है। यह रेफरियों की अच्छे फैसले लेने में मदद कर रहा है।”

इन्फैंटीनो ने कहा कि वीएआर से रेफरी के फैसलों की सटीकता 95 प्रतिशत से 99.2 फीसदी पहुंच गई है। रेफरी के सोलह फैसले बदले गए। सोलह गलत फैसले सही में बदल गए।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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