फेस्टिव सीजन में होगी बेहतर डिमांड : आईसीसीआई

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इंटीग्रेटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (आईसीसीआई) के सचिव डॉ. कुलनीत सूरी ने कहा है कि इस बार के फेस्टिव सीजन में काफी अच्छे डिमांड होंगे। इस कारण से लगभग सभी नामी गिरामी ब्रांड्स के दाम आकर्षक स्तर पर होंगे। डॉ. सुरी ने एक बयान में कहा कि इस फेस्टिव सीजन में नोटबंदी और जीएसटी का कोई खास असर नहीं दिखेगा, और साफ तौर पर दिख रहा है कि बाजार में जोरदार बिक्री होगी।

उन्होंने कहा, “कंपनियों ने पिछले साल के बाजार को ध्यान में रखते हुए कई तरह के ऑफर की सुविधा देने का वादा किया है। जिस प्रकार सरकार लगातार बाजार को उदार बनाने और आगे बढ़ाने के लिए कई नीतियां लाई है, इससे बाजार में उत्साह है। ग्राहकों के लिए भी यह फेस्टिव सीजन काफी अच्छा रहने वाला है, खास तौर पर इंडस्ट्री नोटबंदी के असर से पूरी तरह और जीएसटी के असर से काफी हद तक उबर चुकी है।”

उन्होंने कहा कि बाजार को देखने पर साफ पता चल रहा है कि एफएमसीजी की बिक्री में 10-12 फीसदी की ग्रोथ होगी। जिस प्रकार से ग्रामीण बाजार में तेजी आई है यह सुखद है। खास तौर पर यहां भी 10 फीसदी तक ग्रोथ है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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