दो विवाहित बेटियों को बच्चों संग कमरे में बंद कर पिता ने लगाई आग

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बेटियों के चाल-चलन पर शक करने वाले पिता ने भयानक कदम उठा लिया। आरोपी ने दो विवाहित बेटियों को बच्चों के साथ कमरे में बंद करके, बाहर से आग लगा दी। उसके बाद आरोपी ने खुद ही घटना की सूचना पुलिस को दे दी। पुलिस ने दोनो विवाहित लड़िकयों को उनकी दोनो मासूम बेटियों के साथ झुलसी हुई हालत में अस्पताल में दाखिल कराया है। लोनी पुलिस के मुताबिक, घटना चिरोड़ी गांव की है। जिन विवाहित लड़कियों के साथ पिता ने यह बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया उनका विवाह अलीगढ़ में हुआ है। दोनो बहनें लंबे समय से मायके में ही रह रही थीं।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी पिता बेटियों के मायके में रहने और उनके चाल चलन को लेकर परेशान था। झुलसी हुई दो विवाहित बहनों में से एक लड़की के दो छोटी बेटियां भी हादसे का शिकार हुई हैं।

शनिवार को पिता ने षड्यंत्र रचकर दोनो बेटियों और एक बेटी की दोनो छोटी-छोटी बेटियों को कमरे में बहाने से बंद कर दिया। उसके बाद उसने बहार से कमरे में आग फेंक दी। अचानक कमरे में पिता को आग फेंकते देख घर में कोहराम मच गया। कमरे में बंद दोनो शादीशुदा बहने और उनमें से एक दोनो बेटियां चीख-पुकार मचाने लगीं।

आसपास के लोगों ने जाकर कमरे की कुंडी खोलकर चारो को झुलसी हुई हालत में कमरे से बाहर निकाला। चारो को दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में दाखिल कराया गया है। दोनो छोटी बच्चियों की हालत गंभीर बतायी जा रही है। पुलिस ने हत्या की कोशिश के आरोप में पिता को गिरफ्तार कर लिया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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