Farmer Laws 2020: क्यों हो रहा है कृषि कानूनों का विरोध? जानें पूरा विवाद….

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हाल में केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को लेकर तीन नए विधेयक पास किए है्ं। नए कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब से लेकर हरियाणा तक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। दिल्ली में पंजाब हरियाणा के लाखों किसान जुटे हुए हैं। सवाल उठते हैं आखिर कृषि कानूनों को लेकर किसान सड़कों पर क्यों उतरे हैं। कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब, हरियाणा, राजस्थान सहित की की जगहों के किसान विरोध पर उतरे हैं। इन राज्यों में केंद्र और राज्य सरकारें एमएसपी दर पर चावल और गेंहू सबसे ज्यादा खरीदती है। पंजाब और हरियाणा में चावल और गेंहू की सबसे ज्यादा पैदावार होती है।

किसानों को आशंका है कि बिल जैसे ही धरातल पर उतरकर प्रभाव डालेंगे तो एमएसपी खत्म हो जाएगी। किसान बाजार में फसले बेचने लगेगा तो मंडिया में आवक खत्म होगी। इससे धीरे-धीरे मंडियों को समाप्त कर दिया जाएगा। किसानों को डर है कि निजी कंपनियां न्यूनतम समर्थन मूल्य से भी कम दाम पर किसानों से उत्पाद खरीदेगी। आंदोलनकारी किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि ये तीनों बिल कृषि का निजीकरण करेंगे। इनसे बड़े कॉरपोरेट घरानों को ज्यादा फायदा होगा।

दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सरकार के सामने कई मांगे रखी हैं। किसानों का कहना है कि एमएसपी व्यवस्था खत्म नहीं हो। इसके लिए सरकार को अलग से एक विधेयक लाना चाहिए। किसान संगठन बिजली बिलों का भी विरोध कर रही है। सरकार बिजली वितरण प्रणाली का निजीकरण कर रही है। इससे किसानों को सब्सिडी आधारित सुविधा खत्म हो जाएगी।

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