साइकिल पर 5,145 किमी चलकर मॉस्को पहुंचा सऊदी अरब का प्रशंसक

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फीफा विश्व कप में हिस्सा ले रही टीमों के प्रशंसकों का जुनून आंका नहीं जा सकता। अपनी टीमों का समर्थन करने के लिए प्रशंसक हर जगह से रूस पहुंच रहे हैं, लेकिन एक प्रशंसक ने जुनून की हद को पार करते हुए 5,145 किलोमीटर का रास्ता दो पहियों पर तय कर रूस में प्रवेश किया। फीफा विश्व कप में आज (गुरुवार) शाम 8.30 बजे मेजबान टीम रूस की भिड़ंत सऊदी अरब से हो रही है। ऐसे में फहद अल-याहया हर हाल में इस मैच में उपस्थित रहकर अपनी टीम का समर्थन करने के लिए इतना लंबा सफर तय कर मॉस्को पहुंचे। फदद ने 75 दिनों की यात्रा के बाद रियाद से मॉस्को में प्रवेश किया।

फाहद हाथों में अपने देश का राष्ट्रध्वज लेकर साइकल पर सवार होकर चार देशों से होते हुए रूस मॉस्को में पहुंचे। वेबसाइट ‘फीफा डॉट कॉम’ को दिए बयान में सऊदी अरब के इस प्रशंसक ने कहा, “रियाद क्षेत्र के प्रिंस फेसल बेन बदार अब्दुल्लाजीज ने मुझे राष्ट्रध्वज दिया और मैं इसे 5,145 किलोमीटर का रास्ता तय करते मॉस्को में सऊदी अरब के दूतावास पहुंचा हूं। मैंने इस ध्वज को राजदूत राएद करीमिल को सौंपा।”

सऊदी अरब के 28 वर्षीय साइकिलिस्ट फहद ने कहा, “मैं अपनी टीम का समर्थन करता चाहता था और इसीलिए, मैंने यह यात्रा की।”

फहद इसके अलावा, सेंट पीटर्सबर्ग में सऊदी अरब की टीम बेस पहुंचे, जहां सऊदी अरब फुटबाल महासंघ के अध्यक्ष अदेल एजात ने उनका स्वागत किया।

इस सफर के दौरान फहद ने कई तरह की दिक्कतों का सामना किया। उन्हें पीठ में दर्द की शिकायत हुई और एक वक्त ऐसा भी आया, जब उनकी भिड़ंत लॉरी से हो गई लेकिन उनका सफर नहीं रुका और अब वह अपनी टीम की हौसलअफजाई के लिए रूस में हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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