आखिर किस बीमारी से पीड़ित थे मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग? जानिए यहां पर

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स्टीफन हॉकिंग जब 21 साल के थे तभी उन्हें अपने शरीर में पल रही गंभीर बीमारी के बारे में पता चल गया था। हम आपको आज इस बीमारी के बारे में बताते है जिसने इस प्रसिद्ध वैज्ञानिक को बुरी तरह से प्रभावित किया था। मोटर न्यूरॉन नामक इस बीमारी में शरीर की नसें लगातार कमजोर होती जाती हैं। धीरे-धीरे शरीर लकवाग्रस्त हो जाता है।

इस बीमारी में शरीर के सारे अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं, और आखिर में मरीज की मौत हो जाती है। हालांकि डॉक्टरों ने कहा था कि स्टीफन हॉकिंग दो वर्ष से अधिक नहीं जी पाएंगे और जल्द ही उनकी मौत हो जायेगी। लेकिन स्टीफन ने अपनी विल पावर के दम पर शारीरिक विकलांगता को अपने ऊपर हावी होने नहीं दिया। उन्होंने अपने शोध कार्य को निरंतर जारी रखा।

दुनिया में केवल 5 प्रतिशत लोग ही ऐसे होते हैं इस बीमारी से ग्रसित होने के बाद एक दशक तक जीवित रह पाते हैं। बीमारी की शुरूआत में तो रोगी उठ बैठ सकता है। लेकिन वक्त बीतने के साथ रोगी का चलना दूभर हो जाता है। उसके सारे अंग नाकारा साबित होने लग जाते हैं। इस बीमारी में रीढ़ से जुड़ी कोशिकाओं जिन्हें मोटर न्यूरॉन कहते हैं, वे काम करना बंद कर देती हैं।

ज्यादातर मामलों के लिए इस बीमारी के लिय़े जीन ही जिम्मेदार होते हैं। इसके लिए अभी तक कोई टेस्ट या इलाज नहीं खोजा जा सका है। हालांकि तंत्रिका तंत्र के द्वारा इसका काफी हद तक निदान किया जा सकता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में यह रोग अधिक होता है। इस बीमारी के लक्षणों को विशेष ध्यान रखकर कुछ समय के लिए कम किया जा सकता है। जैसे कि सांस लेने के लिए मास्क का प्रयोग करना, खाने के लिए फीडिंग ट्यूब का प्रयोग करना आदि। स्टीफन हॉकिंग ने इस बीमारी को वरदान की तरह गले से लगाया और दुनिया को दिखा दिया कि इच्छा शक्ति के बल पर काफी कुछ किया जा सकता है।

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