फैज की कविता भारतीय छात्रों को पढ़ाई जानी चाहिए : फैज के नाती

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मशहूर शायर फैज अहमद फैज की कविता ‘हम देखेंगे’ इन दिनों विवाद में है। नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध प्रदर्शन में जामिया से लेकर आईआईटी कानपुर तक में इस कविता के जरिये छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद की। इस कविता को हिंदू विरोधी और सांप्रदायिक करार देकर इसे कटघरे में खड़ा किया जा रहा है। अब इस मुद्दे पर फैज के नाती ने कहा है कि उनकी कविताएं भारतीय छात्रों को अनिवार्य रूप से पढ़ाई जानी चाहिए। गल्फ न्यूज के अनुसार, फैज की बेटी के बेटे अली मदीह ने कहा, “फैज की कविताओं को भारतीय छात्रों को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाना चाहिए।”

फैज की जीवनी ‘लव एंड रिवोल्यूशन’ लिखने वाले अली मदीह ने कविता पर उठे विवाद पर कहा कि यह किसी रचना को सतही तौर पर देखने की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा, “कविताएं संकेतों, प्रतीकों के जरिये व्यक्त की जाती हैं, इसी तरह मुहावरों का भी प्रयोग किया जाता है, जैसे- ‘सब बुत उठवाए जाएंगे’ और इस आधार पर किसी कविता को हिंदू विरोधी करार देने हास्यास्पद है।”

बताया जाता है कि आईआईटी कानुपुर में शिकायतकर्ता ने ‘सब बुत उठवाए जाएंगे’ पर यह कहते हुए आपत्ति जाहिर की है कि एक ऐसे देश में जहां 80 फीसदी मूर्तिपूजक हैं वहां बुत उठाने की बात धर्म पर हमला है।

पाकिस्तान में फैज फाउंडेशन के ट्रस्टी मदीह ने कहा, “भारत के सभी विश्वविद्यालयों में उर्दू कविता का मॉड्यूल पढ़ाया जाना चाहिए और फैज को सभी भारतीय छात्रों के लिए पढ़ना अनिवार्य कर देना चाहिए।”

जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में आईआईटी कानपुर के छात्रों ने 17 दिसंबर को कैंपस में शांति मार्च निकाला था और इस दौरान फैज की कविता ‘हम देखेंगे’ गाई थी। इस कविता को हिंदू विरोधी और सांप्रदायिक करार देते हुए इसकी शिकायत प्रशासन से की गई और और प्रशासन ने एक समिति गठित कर इस पर जांच बैठा दी। हालांकि अब जब इस मुद्दे पर आईआईटी कानपुर की आलोचना हुई तो प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच व्यापक तौर पर की जा रही है, केवल कविता की जांच नहीं हो रही।

मशहूर शायर और गीतकार गुलजार ने फिल्म ‘छपाक’ के गाने के लांच के बाद मीडिया से कहा था, “फैज अहमद फैज को सब जानते हैं। उन्होंने जिया-उल-हक के जमाने में इस नज्म को लिखा था। अगर हम उसे आउट ऑफ कॉन्टेक्स्ट प्लेस कर दें, तो इसका कोई मतलब नहीं बनता है।”

प्रख्यात शायर और गीतकार जावेद अख्तर ने फैज की कविता को हिंदू विरोधी बताए जाने पर कहा, “फैज की किसी बात को या उनके शेर को एंटी हिंदू कहा जाए, यह इतना बेतुका है कि इस पर सीरियसली बात करना थोड़ा मुश्किल होगा। वह आदमी जिसकी जिंदगी के जितने बरस पाकिस्तान के हैं उनमें से आधे बरस तो मुल्क से बाहर गुजारे, क्योंकि वह उस मुल्क में रह नहीं सकता था, उन्हें एंटी पाकिस्तानी बुलाने लगे थे।”

गौरतलब है कि इस कविता का इस्तेमाल सत्ता के विरोध के तौर पर पाकिस्तान में पहली बार तब हुआ जब तत्कालीन जि़या-उल-हक की सरकार ने साड़ी को बैन कर दिया था। उस वक्त 1986 में इकबाल बानो ने लगभग 50,000 लोगों के सामने साड़ी में यह कविता गाई थी और जैसे ही इसकी पंक्ति आई ‘सब ताज उछाले जाएंगे, सब त़ख्त गिराए जाएंगे’ वैसे ही मौजूद भीड़ ने ‘इंकलाब जि़ंदाबाद’ नारे लगाने शुरू कर दिए थे।

फैज ने यह कविता 1979 में सैन्य तानाशाह जिया-उल-हक के संदर्भ में लिखी थी और पाकिस्तान में सैन्य शासन के विरोध में लिखी थी। फैज अपने क्रांतिकारी विचारों के कारण जाने जाते थे और इसी कारण वे वर्षो तक जेल में रहे।

इस कविता में उन्होंने लिखा था..हम देखेंगे/लाजि़म है कि हम भी देखेंगे/वो दिन कि जिसका वादा है/जो लौह-ए-अजल में लिखा है/जब जुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गरां/ रुई की तरह उड़ जाएंगे/हम महकूमों के पांव तले/ये धरती धड़-धड़ धड़केगी/और अहल-ए-हकम के सर ऊपर/जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी/जब अर्ज-ए-खुदा के काबे से/सब बुत उठवाए जाएंगे/हम अहल-ए-सफा, मरदूद-ए-हरम/मसनद पे बिठाए जाएंगे/सब ताज उछाले जाएंगे/सब त़ख्त गिराए जाएंगे/बस नाम रहेगा अल्लाह का/जो गायब भी है हाजिर भी/जो मंजर भी है नाजिर भी/उट्ठेगा अन-अल-हक का नारा/जो मैं भी हूं और तुम भी हो/और राज करेगी खुल्क-ए-खुदा/जो मैं भी हूं और तुम भी हो।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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