फेसबुक ने फर्जी खातों पर लगाया लगाम, जानिए कैसे ?

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दुनिया की सबसे बड़ी सोशल मीडिया नेटवर्क फेसबुक ने शुक्रवार को अपने प्लेटफार्म पर नकली या घुसपैठिया खातों को चलाना अधिक कठिन बनाने के लिए कदम उठाए हैं, और यूजर्स से प्राधिकृति की मांग की है। अमेरिका में कंपनी के बड़ी संख्या में यूजर्स हैं। फेसबुक ने कहा, “आज हमने पेज प्रकाशित करने के लिए प्राधिकृति की शुरुआत की है, ताकि लोग अमेरिका में बड़े दर्शक वर्ग के साथ पेज का प्रबंधन कर सकें।”

कैलिफोर्निया स्थित मुख्यालय वाली सोशल कंपनी ने कहा कि जो लोग इन पेजों का प्रबंधन करेंगे, उन्हें प्राधिकृति की प्रक्रिया से गुजरना होगा, ताकि वे पोस्ट करना जारी रख सकें। इससे जो फर्जी या घुसपैठ किए गए खातों के माध्यम से पेज का प्रबंधन करते हैं, उनके लिए ऐसा करना मुश्किल हो जाएगा।

नए कदमों के बाद फेसबुक पेज के प्रबंधकों को अपना खाता सुरक्षित रखने के लिए दो चरणों के प्रमाणीकरण प्रक्रिया से गुजरना होगा तथा अपने प्राथमिक घर के पते की भी पुष्टि करनी होगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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