यहां हर व्यक्ति के पास है सिर्फ एक किडनी, जीते हैं एक ही किडनी के सहारे…

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हम सब जानते है कि हमारे शरीर में दो किड़नी होती है मगर क्या हो जब आपके पास केवल एक ही किडनी हो । आज हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने जा रहे है जहां के लोगों के पास केवल एक ही किडनी है और लोग इसी के सहारे ​जीते हैं ।

आपको बता दें कि, भारत के पड़ोसी देश नेपाल में होकसे नाम की जगह पर लोगों के पास में केवल एक ही किडनी है। बताया जा रहा है कि यह गांव इतना गरीब है कि यहां के लोगों के केवल एक ही समय को खाना मिलता है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यहां के लोगों ने अपने परिवार के पालन पोषण के लिए एक किडनी बेच दी है ताकि उनका परिवार दो समय का खाना खा सके । यहां पर रहने वाले गीता ने इसके बारे में बताया है कि उसने करीब 10 साल पहले अपनी एक किडनी बेच दी थी जिसके बदले में उनको करीब सवा लाख रूप्ए मिले थे जिससे उन्होंने अपने ​परिवार को पाला । इसके आगे गीता ने बताया है ​कि इस गांव के लोग करीब 20 साल की उम्र मे आते आते ही अपनी एक किड़नी को बेच देते हैं ।

इसके आगे बताया जा रहा है कि इस गांव में जब भी किसी परिवार को पैसे की आवश्यकता होती है तो परिवार के किसी सदस्य को अपनी किडनी बेचनी पडती है। यहां पर ऐसा करना आम बात हैं ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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