हर दिन नई आकृति बनाकर इस सरकारी स्कूल में होती है प्रार्थना, ताकि बच्चों में बना रहे उत्साह

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आज हम आपको राजस्थान के एक ऐसी सरकारी स्कूल के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर रोजाना बच्चे अलग अलग आकृति बना कर प्रार्थना करते हैं । यहां बच्चे सुबह लाइन में लग कर नहीं बल्कि सूर्य, चक्र, धरती माता, भारत का नक्शा, ऊं, स्वास्तिक और फूल की पंखुड़ियों के आकार की मानव शृंखला बनाकर करते है । स्कूल प्रशासन ने इसके बारे में बताया कि, रोजाना स्कूल आने की रोचकता बच्चों में पैदा हो और उत्साह बना रहे । साथ ही अनुशासन में रहना सीख सकें ।

आपको बता दे, इस अनोखी तरीके से प्रार्थना करने की शुरुआत दो साल पहले शिक्षक रमेश जोशी ने की थी । शिक्षक का आदेश मिलने पर बच्चे महज 5 मिनट में खड़े होकर किसी भी आकृति की पोजिशन ले लेते हैं । इसके आगे प्रिंसिपल संत कुमार ने बताया कि इस पहल से स्कूल में बच्चों की संख्या और उपस्थिति दोनों बढ़ गई है ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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