एवर्टन के डिफेंडर लाइटन बैन्स ने फुटबाल से लिया संन्यास

0

इंग्लिश प्रीमियर लीग क्लब एवर्टन के खिलाड़ी लाइटन बैन्स ने फुटबाल से संन्यास लेने की घोषणा की है। बैन्स, 2007 में विगन एथलेटिक क्लब से एवर्टन से जुड़े थे। उन्होंने क्लब के लिए 420 मैचों में 39 गोल किए हैं।

35 साल के बैन्स ने एवर्टन के लिए अपना पिछला मैच 2019-20 प्रीमियर लीग सीजन में बोर्नमाउथ के खिलाफ खेला था।

बैन्स ने क्लब की वेबसाइट पर कहा, “पिछले 13 वर्षों से एवर्टन का प्रतिनिधित्व करने से मैं अविश्वसनीय रूप से गर्व महसूस कर रहा हूं और संन्यास लेने का मेरा निर्णय एक मुश्किल है। अपने परिवार से बात करने के बाद, मुझे लगता है कि अब मुझे अपने करियर को समाप्त करने का सही समय है।” बैन्स ने इंग्लैंड के लिए 30 मैच खेले हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleनीतीश अस्थाना पाइन लैब्स के अध्यक्ष और सीओओ नियुक्त
Next articleतमिल अभिनेत्री विजयलक्ष्मी ने कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश की
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here