लीबिया में संयुक्त राष्ट्र के कार्यों के लिए यूरोप संघ ने दिए 1.4 करोड़ डॉलर

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यूनाइटेड नेशन हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजी (यूएएचआरसी) ने कहा है कि लीबिया में संयुक्त राष्ट्र की गतिविधियां जारी रह सके, इसके लिए यूरोप संघ ने ‘यूरोप यूनियन ट्रस्ट फंड’ (ईयूटीएफ) के माध्यम से 1.3 करोड़ यूरो (1.4 अमेरिकी डॉलर) प्रदान किए हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने यूएनएचसीआर के सोमवार के ट्वीट के हवाले से कहा, “यूएनएचसीआर लीबिया, जीवन बचाने और शरणार्थियों के लिए टिकाऊ समाधान खोजने के लिए जारी गतिविधयों में सहयोग के लिए ईयूटीएफ का आभारी है।”

गौरतलब है कि संघर्ष विराम के लिए अंतर्राष्ट्रीय अपील के बावजूद राजधानी स्थित त्रिपोली व उसके आसपास में पूर्व-स्थित सेना और संयुक्त राष्ट्र समर्थित सरकार के बीच सशस्त्र संघर्ष जारी है।

यूएनएचसीआर के अनुसार, वर्तमान में लीबिया में एजेंसी के साथ 48,621 शरणार्थी पंजीकृत हैं।

4 अप्रैल 2019 को पूर्व-आधारित सेना ने शहर पर कब्जा करने के इरादे से त्रिपोली और उसके आसपास एक सैन्य अभियान शुरू किया, ताकि वह संयुक्त राष्ट्र समर्थित सरकार का तख्तापलट कर सके।

लीबिया में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (यूएनएसएमआईएल) ने सशस्त्र संघर्ष में अब तक कम से कम 356 नागरिक की मृत्यु और 329 के घायल होने की बात कही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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