ईएसआईसी ने फर्जी प्रसव घोटाले का भंडाफोड़ किया

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गर्भधारण करने और बच्चे को जन्म देने में साधारण मामलों में भले ही तकरीबन साल भर का समय लगता हो, लेकिन कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) से जुड़ी कुछ महिला कर्मचारियों के लिए ऐसा नहीं है।

ईएसआईसी के एक आंतरिक ऑडिट में खुलासा हुआ है कि निगम से जुड़ी निजी सेक्टर की दर्जनों महिला कर्मचारियों ने खुद को गर्भवती दर्शा कर एक साल में कम से कम चार बार बीमा और मातृत्व अवकाश के अन्य लाभ उठाए और कुछ मामलों में तो इससे भी ज्यादा।

फरीदाबाद के सेक्टर 16 में स्थित ईएसआईसी के क्षेत्रीय कार्यालय के ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी मेडिकल रिपोर्ट्स जमा करके यह फर्जीवाड़ा किया गया।

मातृत्व अवकाश के तहत 26 सप्ताह की सवैतनिक छुट्टी मिलती है।

दिल्ली में ईएसआईसी मुख्यालय का सर्तकता विभाग इस मामले की जांच कर रहा है।

ईएसआईसी की सर्तकता टीम ने मामले से जुड़े पिछले तीन सालों के दस्तावेज मांगे हैं।

ईएसआईसी के क्षेत्रीय कार्यालय के आयुक्त, डी.के. मिश्रा ने कहा, “हमने मामले से जुड़े दस्तावेज सौंप दिए हैं। सतर्कता विभाग ने इस संबंध में पिछले तीन सालों के रिकॉर्ड भी मांगे हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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