EPFO ने किया 44 लाख दावों का समाधान, बांटे 11,500 करोड़ रुपये

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केंद्रीय श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने ईपीएफओ के दिल्ली पश्चिम कार्यालय के कर्मचारियों और अधिकारियों को बेहतर कार्य के लिए सोमवार को सम्मानित किया। कोरोना काल में 24 घंटे के भीतर आवेदनों का निपटारा करने वाले स्टाफ के लिए यह सम्मान कार्यक्रम हुआ। इस दौरान केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने बताया कि पिछले 175 दिनों के दौरान प्राप्त कोविड-19 आवेदनों का शत-प्रतिशत निपटारा 24 घंटे के भीतर किया गया। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ईपीएफओ के नागरिक चार्टर में 3 दिनों की समय-सीमा होते हुए भी अन्य प्रकार के दावों का 90 प्रतिशत निपटारा 24 घंटों के भीतर किया गया। ईपीएफओ ने 15 अक्तूबर, 2020 तक 11,500 करोड़ रुपये वितरित करते हुए 44 लाख से अधिक कोविड अग्रिम दावों का निपटारा किया। श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संतोष गंगवार ने ईपीएफओ की पारदर्शिता एवं सक्षमता मॉडल का अनुसरण भारत के अन्य कार्यालयों द्वारा किए जाने की अपील की।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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