आईसीसी सदस्यों के न मिलने से चुनावों पर असर पड़ा : John Barkley

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अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट समिति (आईसीसी) के नए चेयरमैन जॉन बारक्ले ने कहा है कि आईसीसी के कार्यकारी बोर्ड के सदस्य मिलने में असमर्थ थे और कोविड-19 के कारण लगी पाबंदियों के चलते वह चुनावों को लेकर कोई रास्ता नहीं निकाल पा रहे थे।

चुनाव प्रक्रिया को लेकर कई असहमतियों के बाद आईसीसी ने 25 नवंबर को न्यूजीलैंड के बारक्ले को अपना नया चेयरमैन नियुक्त करने की घोषणा की।

भारत के शशांक मनोहर के इस्तीफा देने के बाद से यह पद खाली पड़ा था।

बारक्ले ने सोमवार को कहा कि आईसीसी चेयरमैन के तौर पर उनका ध्यान अच्छे संवाद की ओर होगा।

बारक्ले ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “समस्या का एक कारण यह था कि हम कोविड के कारण मिल नहीं सकते थे। मुझे भरोसा है कि अगर हम दुबई (आईसीसी मुख्यालय) में आते तो हम कई मुद्दों पर काम करते। यह हमारे लिए अजीब स्थिति है जिसमें हम अपने मुद्दे नहीं सुलझा सकते क्योंकि हम आपस में मिल नहीं सकते।”

उन्होंने कहा, “शशांक के इस्तीफा देने पर, हमारे पास कोई चेयरमैन नहीं रहा, जिससे हम प्रक्रिया को लेकर दिशाहीन हो गए। अब हकीकत यह है कि हमारे पास एक प्रक्रिया है और चेयरमैन भी। मैं मुद्दों को सुलझाने में मदद करूंगा। मैं यह कर सकता हूं कि मैं आईसीसी में अपने विचार रखूंगा जो मैंने किया है।”

हेमिल्टन में जन्में बारक्ले ने कहा कि वह आईसीसी निदेशकों से निजी तौर पर बात करेंगे।

उन्होंने कहा, “मैं आने वाले दिनों में हर निदेशक से निजी तौर पर बात करूंगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सभी एक ही मंच पर हैं और समझते हैं कि आईसीसी की जरूरतें क्या हैं।”

बारक्ले ने गोपनीय चुनावी प्रक्रिया में सिंगापुर के इमरान ख्वाजा को मात दी है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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