अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन की जरूरत : एसबीआई चेयरमैन

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भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने रविवार को कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन की दरकार है क्योंकि ऋण की मांग मंद पड़ गई है। हालांकि अर्थव्यवस्था में कर्ज की मांग का अभाव है लेकिन आपूर्ति पक्ष को लेकर कोई रोक नहीं है क्योंकि सार्वजनिक बैंकों के पास काफी पूंजी है।

रजनीश कुमार ने मीडिया से कहा, “अर्थव्यवस्था में कर्ज की मांग कमजोर है। अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन की जरूरत है।”

एसबीबाई प्रमुख यहां के बहुस्तरीय परामर्श कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे थे जिसमें बैंक के इस क्षेत्र के शाखा प्रबंधकों ने हिस्सा लिया।

मानसून के सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद करते हुए उन्होंने कहा, “आपूर्ति के पक्ष में कोई कमी नहीं है। कमोबेस सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पास पर्याप्त पूंजी है और बैंक रेट भी कम है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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