नेपाल, तिब्बत में भूकंप के झटके

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नेपाल में बुधवार को रिक्टर पैमाने पर 5.2 की तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

यह भूकंप साल 2015 में आए प्रलयकारी भूकंप के चार साल पूरा होने के ठीक एक दिन पहले आया है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ के मुताबिक, नेशनल इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर ने ट्वीट कर जानकारी दी कि राजधानी की सीमा से लगे धादिंग में सुबह 6.29 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह के भूकंप के बाद उसी जिले में 4.3 की तीव्रता के फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए।

चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र ने कहा कि रिक्टर पैमाने पर 6.3 तीव्रता का भूकंप तिब्बत के मेदोग काउंटी में तड़के 4.15 बजे 10 किलोमीटर की गहराई पर आया।

नेपाल में 25 अप्रैल, 2015 को बड़े पैमाने पर भूकंप ने तबाही मचाया था, जिसमें लगभग 9,000 लोग मारे गए थे और पांच लाख से ज्यादा लोग बेघर हो गए थे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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