एस्टोनिया के ई-रेजिडेंट्स में मुकेश अंबानी, रविशंकर प्रसाद शामिल

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एस्टोनिया के ई-रेजिडेंसी कार्यक्रम के तहत नामांकन करने वाले भारतीयों में रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आआईएल) के अध्यक्ष मुकेश अंबानी और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद शामिल हैं। यह जानकारी बुधवार को भारत में एस्टोनिया के राजदूत रिहो क्रूव ने दी। एस्टोनिया के ई-रेजिडेंसी कार्यक्रम की शुरुआत 2014 में हुई थी और इसमें 2,174 लोग नामांकन कर चुके हैं जिनमें 2018 में 1,062 भारतीयों ने आवेदन किया।

दूतावास ने कहा कि इस प्रक्रिया में एस्टोनिया की करीब 286 नई कंपनियां भारतीयों ने बनाई है, जिनमें अधिकांश स्टार्टअप व अन्य वेब डिजाइनिंग, सॉफ्टवेयर प्रोग्रामिंग, कंटेंट राइटिंग व अन्य कार्य करने वाले फ्रीलांसर हैं।

क्रूव ने कहा, “रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एस्टोनिया में जियो के लिए एक रिसर्च सेंटर स्थापित किया है जिसका मकसद एस्टोनिया के डिजिटल समाज को समझना और यह जानना है कि वह भारत व भारतीयों को क्या फायदे दे सकते हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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