College of Art को डीयू से अलग करने पर डूटा की चेतावनी

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दिल्ली सरकार ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ आर्ट को अम्बेडकर विश्वविद्यालय के अंतर्गत लाने का फैसला किया है। दिल्ली सरकार के मंत्रिमंडल ने कॉलेज ऑफ आर्ट्स के मर्जर को मंजूरी दे दी है। दिल्ली सरकार के इस कदम पर दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक कड़ा ऐतराज जता रहे हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन यानी डूटा ने सरकार को चेतावनी देते हुए इस फैसले की निंदा की है। डूटा के अध्यक्ष राजीब रे ने कहा, “यह दिल्ली सरकार द्वारा दिल्ली विश्वविद्यालय के वैधानिक प्रावधानों की अवहेलना का एक और उदाहरण है। यह दिल्ली विश्वविद्यालय के तहत आने वाले वित्त पोषित कॉलेजों में शासन के मुद्दों से निपटने में दिल्ली सरकार के रवैये का खुलासा करता है।”

डूटा ने कहा, “इससे पहले पिछले हफ्ते, सरकार ने कॉलेजों को बिना किसी स्पष्ट संकेत के दिल्ली सरकार के अधिकारियों को पूरी तरह से 12 वित्त पोषित कॉलेजों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था। बिना किसी आधार के इन कॉलेजों में वित्तीय दुर्व्यवहार का आरोप लगाने का यह स्पष्ट मामला है। दिल्ली सरकार का यह अत्यंत निंदनीय और गैरकानूनी कार्य कॉलेजों के प्रशासनिक कामकाज में एक हस्तक्षेप है। इन प्रशासनिक अधिकारियों (एओ) की नियुक्ति वैधानिक प्रावधानों का घोर उल्लंघन है। इसका उद्देश्य इन संस्थानों और शिक्षकों और कर्मचारियों को परेशान करना है।”

डूटा के मुताबिक दिल्ली सरकार द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित दिल्ली विश्वविद्यालय के 12 कॉलेजों के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों को दिल्ली सरकार द्वारा अनुदान की देरी के कारण पहले से ही बहुत नुकसान हो रहा है, जो उनके वित्तीय, शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज को प्रभावित कर रहा है। इन कॉलेजों के कर्मचारियों को कई महीनों से वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं किया गया है और अन्य शुल्क जैसे कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति आदि भी नहीं मिल रहे हैं।

राजीब रे ने कहा कि डूटा दिल्ली सरकार के रुख की कड़ी निंदा करता है और इन संस्थानों और कर्मचारियों के उत्पीड़न के खिलाफ चेतावनी देता है।

गौरतलब है कि यह कोई पहला अवसर नहीं है जब दिल्ली विश्वविद्यालय के किसी संस्थान को डीयू से अलग किसी अन्य यूनिवर्सिटी के साथ जोड़ा गया है। वर्ष 2009 में दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग को इसी तरह से डीयू से हटाकर एक अलग विश्वविद्यालय बनाया गया था। इसे दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी कहा जाता है। 2019 में नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को भी दिल्ली सरकार ने नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के रूप में बदल दिया गया था।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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