पंचायत बोर्ड गठन के दौरान हिंसा में घायल बच्चा कोलकाता लाया गया

0
86

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के एक तीन साल के बच्चे को रविवार को कोलकाता के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। बच्चे को बीते महीने पंचायत बोर्ड गठन के दौरान झड़प में सिर में गोली लग गई थी। इलाके के तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कार्यकर्ताओं के बीच सशस्त्र संघर्ष के दौरान 30 अगस्त को मृणाल मंडल को गोली लग गई थी।

मृणाल की मां पितुल मंडल ने भाजपा के टिकट पर माणिकचक पंचायत बोर्ड की एक सीट पर जीत हासिल की थी, लेकिन बाद में उन्होंने तृणमूल में जाने का फैसला किया।

अस्पताल के एक चिकित्सक ने कहा, “उसे सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कराया गया है। उसका घाव गंभीर है। हमने सीटी स्कैन किया और उसे निगरानी में रखा गया है।”

बच्चे के पिता ने कहा, “जिस शल्य चिकित्सक ने उसके जख्मों की सर्जरी की थी, उसने कहा कि उसकी स्थिति में सुधार हो रहा है। हालांकि, उसकी कुछ और सर्जरी करनी पड़ेगी। चिकित्सक ने हमसे उसे कोलकाता ले जाने को कहा, जहां बेहतर इलाज की सुविधाएं मौजूद हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleअपनी बेटी मीशा को मिल रही लगातार मीड‍िया अटेंशन से परेशान हैं शाहिद कपूर
Next articleधोनी ने अपनी जिंदगी का कर दिया ये बड़ा खुलासा
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here