कार्ययोजना की कमी से दिल्ली फिर प्रदूषण की चपेट में

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ग्रीनपीस इंडिया के सीनियर कैंपेनर सुनील दहिया ने कहा कि हर साल दिवाली के बाद प्रदूषण का विश्लेषण करना हमारी आदत में शुमार हो चुका है। हमें यह समझने की जरूरत है कि पटाखे या फिर पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण सिर्फ कुछ समय के लिए होता है, जबकि साल भर प्रदूषण के दूसरे स्रोत की वजह से दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं रहती है। सुनील दहिया ने एक बयान में कहा कि सबसे बड़ी विडम्बना है कि हम प्रदूषण के सभी स्रोत चाहे वो कोयला पावर प्लांट हो, उद्योग और परिवहन से निकलने वाला प्रदूषण हो या फिर दिवाली और पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण हो, इन सबसे निपटने के लिए एक ठोस कार्ययोजना बनाकर उसे लागू करना अभी भी हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है।

उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि सरकार ज्यादा जिम्मेदारीपूर्वक वायु प्रदूषण से निपटने की कोशिश करेगी, प्रदूषण के सभी स्रोतों से निपटने के लिए लोगों को विश्वास में लेगी तथा कठोर नियम और मानकों को लागू करेगी।

उन्होंने कहा कि हाल ही में भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर आयोजित सम्मेलन में दिसंबर तक राष्ट्रीय स्वच्छ हवा कार्यक्रम को लागू करने का वादा किया है। अब हम लोग उम्मीद करते हैं कि इस कार्यक्रम में उत्सर्जन को कम करने के लिए समय सीमा भी तय की जाएगी और तीन साल में 35 प्रतिशत और अगले पांच साल में 50 प्रतिशत वायु प्रदूषण को कम करने के लक्ष्य को शामिल किया जाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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