द्रविड़ ने मुझे बेहतर खिलाड़ी बनाया : हनुमा विहारी

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भारत के लिए अपने पदार्पण मैच में अर्धशतक लगाने वाले आंध्र प्रदेश के बल्लेबाज हनुमा विहारी ने अपने इस प्रदर्शन का श्रेय पूर्व भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी राहुल द्रविड़ को दिया। वेबसाइट ‘ईएसपीएन’ की रिपोर्ट के अनुसार, हनुमा ने कहा कि वह द्रविड़ के कारण ही एक बेहतर खिलाड़ी बन पाए हैं।

उल्लेखनीय है कि इंग्लैंड के खिलाफ जारी पांचवें और आखिरी टेस्ट मैच में भारत के लिए पदार्पण करते हुए पहली पारी में हनुमा ने 56 रन बनाए। उनके इस प्रदर्शन को बेहद सराहा गया।

इस प्रदर्शन का श्रेय द्रविड़ को देते हुए हनुमा ने कहा, “मैंने अपने पदार्पण से एक दिन पहले उनसे बात की थी। उन्होंने मुझे प्रेरित किया जिसके कारण मेरी घबराहट कम हो पाई।”

हनुमा ने कहा, “उन्होंने (द्रविड़) ने मुझे कहा कि मेरे अंदर कौशल है, मैं मानसिक रूप से तैयार हूं और मुझे बस अपने खेल का आनंद लेना चाहिए। इंडिया-ए में मेरे सफर के लिए मैं उन्हें श्रेय देना चाहता हूं। इस सफर के कारण ही मैं यहां पदार्पण कर पाया। जिस प्रकार से उन्होंने मुझे प्रेरित किया है, उसी कारण मैं एक बेहतर खिलाड़ी बन पाया हूं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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