दूरदर्शन की एंकर नीलम शर्मा नहीं रहीं

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हरदिल अजीज और दूरदर्शन की मशहूर एंकर नीलम शर्मा नहीं रहीं। लंबे समय तक कैंसर से जूझने के बाद वह हार गईं। शनिवार को उनका निधन हो गया। नीलम के निधन की जानकारी दूरदर्शन ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर भी साझा की है।

नीलम का इलाज दिल्ली से सटे नोएडा के एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। वह करीब 20 साल से दूरदर्शन से जुड़ी हुई थीं। इसी साल मार्च में नीलम को नारी शक्ति सम्मान दिया गया था। कार्यक्रम ‘तेजस्वनी’ हो या फिर ‘बड़ी चर्चा’, अधिकांश कार्यक्रमों में नीलम शर्मा की भूमिका हमेशा बढ़चढ़ कर रहती थी। नीलम ने सन् 1995 में दूरदर्शन पर अपने करियर की शुरुआत की थी।

दूरदर्शन ने अपने ट्विटर एकाउंट के जरिये नीलम शर्मा के निधन पर दुख जताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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