कोविड-19 महामारी के बीच अरब क्षेत्र में घरेलू हिंसा बढ़ी : संयुक्त राष्ट्र

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कोरोनावायरस के बढ़ते प्रकोप के बीच अरब क्षेत्र में महिलाओं व लड़कियों को घरेलू हिंसा और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और उनकी स्थिति और खराब हो गई है। संयुक्त राष्ट्र की इकोनॉमी एंड सोशल कमीशन फॉर वेस्टर्न एशिया (ईएससीडब्ल्यूए) की एक नई पॉलिसी ब्रिफ में इस बात की जानकारी दी गई है।

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने ईएससीडब्ल्यूए की एग्जीक्यूटिव सेक्रेटरी रोला दशति के सोमवार के बयान के हवाले से कहा, “वर्तमान में जारी लॉकडाउन के बीच विश्व और अरब क्षेत्र में घरेलू हिंसा में वृद्धि हुई है।”

उन्होंने कहा, “ऐसा माना जा रहा है कि लागू लॉकडाउन में जारी क्वारंटाइन, आर्थिक तनाव, खाद्य असुरक्षा और वायरस (कोविड-19) के संपर्क में आने की आशंका के कारण महिलाओं के साथ हिंसा की घटना में तेजी देखने को मिल रही है।”

दशति ने कहा, “हिंसाग्रस्त क्षेत्र में महिला को महामारी के दौरान मदद मांगने में मुश्किल का सामना करना पड़ेगा।”

ईएससीडब्ल्यूए ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि संकटों के समय में घरों में भोजन और पोषण वितरण हमेशा न्यायसंगत नहीं होता है। महिलाओं और लड़कियों को भोजन की खपत की गुणवत्ता और मात्रा को कम करने को कहा जाता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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