डॉगी ने कुछ यूं दिखाई ‘मानवता’,आपको सोचने पर मजबूर कर देगा यह वीडियो

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इस टाइम जब आए दिन जानवरों के साथ क्रूरता की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, इसी बीच एक वीडियो सामने आ रहा है जो कि सभी का मन मोह रहा हैं । इस वीडियो में एक कुत्‍ता दृष्टिबाधित व्‍यक्ति की कुछ इस तरह मदद करता है कि कोई भी उसकी नेकनीयती की तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाता ।

इस वीडियो में साफ़ देखा जा रहा हैं कि एक महिला अपने पेट्स डॉग के साथ सड़क पर जा रही है। इसी राह से एक दिव्यांग व्यक्ति लाठी के सहारे आ रहा है । शायद उस व्यक्ति को दिखाई नहीं देता है। जबकि रास्ते में एक बड़ा सा लकड़ी का टुकड़ा पड़ा है । रास्‍ते से गुजर रहे लोगों ने भी उसे आगाह नहीं किया गया। यहां तक कि जिस महिला के साथ वह कुत्‍ता चल रहा है, वह भी आगे बढ़ जाती है। लेकिन तभी कुत्‍ता पीछे मुड़ता है और अपने मुंह से लड़की के टुकड़े को हटाकर सड़क के किनारे रख देता और फिर दौड़कर उस महिला के पास लौट जाता है, जिसके साथ वह पहले से चल रहा था ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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