‘ओडिशारा रसगुल्ला’ के जीआई टैग के लिए दस्तावेज जमा : मंत्री सामल

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ओडिशा के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री प्रफुल्ल सामल ने शुक्रवार को यहां कहा कि राज्य सरकार ने ‘ओडिशारा रसगुल्ला’ की भौगोलिक मान्यता (जीआई) दर्जे के लिए जरूरी दस्तावेज जमा कर दिए हैं। एक लिखित प्रश्न के जवाब में मंत्री ने विधानसभा में कहा कि जीआई रजिस्ट्री कार्यालय चेन्नई द्वारा मांगे गए 14 बिंदुओं की जांच सूची का पालन किया गया है।

मंत्री ने कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज 17 अगस्त को जमा हो गए हैं। गौरतलब है कि जीआई रजिस्ट्री ने जून के अंतिम सप्ताह में 14 प्रश्नों पर विस्तृत जानकारी मांगी थी। इसमें राज्य में ओडिशारा रसगुल्ले की उत्पत्ति से जुड़े दस्तावेजी साक्ष्य भी शामिल हैं।

ओडिशा राज्य लघु उद्योग निगम ने ओडिशारा रसगुल्ले के जीआई टैग के लिए फरवरी में आवेदन किए थे।

पश्चिम बंगाल के नवंबर 2017 में बंगलारा रसगुल्ला के लिए जीआई टैग दिए जाने के बाद ओडिशा ने अपने लोकप्रिय मिठाई के लिए जीआई रजिस्ट्री की मांग की है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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