केरल में डॉक्टर हड़ताल पर, जानिए !

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पश्चिम बंगाल में अपने डॉक्टर साथियों पर हाल ही में हुए हमले के मद्देनजर सोमवार को केरल में निजी और राजकीय दोनों अस्पतालों के डॉक्टर भी सांकेतिक हड़ताल पर हैं।

एक ओर जहां निजी क्षेत्रों के डॉक्टरों ने आकस्मिक सेवाओं को उपलब्ध कराने के साथ एक दिवसीय हड़ताल का विकल्प चुना, वहीं सरकारी क्षेत्र के डॉक्टरों ने सभी बाह्य-रोगी सेवाओं के लिए सुबह 8 बजे से 10 बजे तक दो घंटे के लिए सेवाएं बंद रखने का निर्णय लिया।

इसके अलावा सभी सरकार संचालित मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक भी सुबह 10 बजे से लेकर 11 बजे तक एक घंटे के लिए हड़ताल पर रहेंगे।

एक मेडिकल अधिकारी ने बताया कि दंत चिकित्सा सहित सभी निजी क्लिनिक्स को भी बंद रखने के लिए कहा गया है।

यह विरोध प्र्दशन कोलकाता के एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में 10 जून को एक मृत मरीज के परिजनों द्वारा दो जूनियर डॉक्टरों पर किए गए हमले के खिलाफ किया जा रहा है। इसके विरोध में पहले पश्चिम बंगाल के डॉक्टरों ने और बाद में पूरे भारत के डॉक्टरों ने काम बंद कर दिया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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