क्या आप को पता है की शराब से प्यास क्यों नहीं बुझाती

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जब भी हमें प्यास लगती है तो हम लोग पानी पीते हैं मगर क्या आपने कभी सोचा है कि शराब पीने से हमारी प्यास क्यों नहीं बुझती हैं । तो हो जाइए तैयार आज हम आपको इसके बारे में बताने जा रहे हैं । दोस्तों, प्यास लगने का मतलब होता है कि हमारे शरीर में पानी की कमी हो जाना । जिसे पूरा करने के लिए हम लोग पानी पीते हैं । क्यों कि पानी की कमी होने से खून में पानी की कमी हो जाती हैं जिससे रक्तदाब की समस्या बहुत अधिक बढ़ जाती हैं । इसके अलावा खून में पानी की कमी होने से खून गाढ़ा होने लगता है और उसमें सांद्रता भी बढ़ जाती है ।

जब ऐसा होने लगता हैं तो कोशिकाओं द्वारा, इस दिशा में प्रयास किया जाता है । इससे लार ग्रन्थियां आदि अपना स्त्राव निकलना बंद कर देती हैं । जिससे मुह सूखने लगता हैं और हमें प्यास लगने लगती हैं । जिसके बाद जब भी हम पानी पीते हैं तो वह स्थिति वापस से सामान्य हो जाती है और हमारी प्यास बूझ जाती हैं । मगर शराब तो अपने आप में ही ऐसा द्रव हैं, जो पानी को सोखती हैं इस स्थिति में शराब से प्यास बुझने की आशा नहीं की जा सकती।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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