क्या आप जानते हैं, हीरे में भी होता है मेल-फिमेल, जानिए कैसे !

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आज हमने सुना​ था कि केवल इंसान और जानवरों में ही मेल और फीमेल होता है मगर क्या आपने सोचा है कि हीरें में भी मेल और फिमेल हो सकता हैं । सुनकर हैरान होने की आवश्यकता नहीं हैं मगर यह सच है । दोस्तों, आज के समय ऐसा ही शायद कोई होगा जिसे की हीरा पसंद नहीं होगा । मगर क्या हो जब उसमें भी जेंडर हो । मगर आज हम आपको इसके बारे बताने जा रहे हैं ताकि आप अपने जेंडर के हिसाब ही हीरा खरीदें और उसे पहन सके ।

नर हीरा- आपको बता दें कि, पुरुष जाति का हीरा उत्तम, गोलाकार चमकदार, भारी तथा रेखा और बिन्दुओं से हीन यानी एकदम साफ होता है।

स्त्री हीरा- स्त्री जाति का हीरा छ: कोने के रेखाओं और बिन्दुओ से संयुक्त रहता है।

नंपुसक हीरा- इसके साथ ही अपको बता दें कि, नंपुसक हीरा त्रिकोणाकार और भारी होता है।

बताया जाता है कि, पुरुष जाति का हीरा रस यानी पारे को बांधने में उत्तम होता हैं, महिला जाति का हीरा आपकी चमक बढ़ाने का काम करता हैं मगर नपुंसक जाति का हीरा वीर्यविहीन, कामवर्जित और सत्व शून्य होता है।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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