क्या आप जानते श्रीकृष्ण की बेटी का राज

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भगवान श्री कृष्ण को सभी जानते हैं उनकी पूजा करते है लेकिन क्या आप जानते है उनकी एक पुत्री भी थी। म​हाभारत में बताया गया है श्रीकृष्ण ने विदर्भ के राजा भीष्मक की पुत्री रूक्मणि का उसकी खुद की इच्छा के अनुसार हरण हर उसके साथ विवाह किया था। रूक्मणि भगवान श्रीकृष्ण की आठ पत्नियों में पहली पत्नि थी।

सबसे प​हले श्रीकृष्ण की पत्नियों में रूक्मणि ने ही पुत्रों को जन्म दिया था यह उनकी पहली पत्नि होने के साथ ही सभी रानियों में बडी व प्रमुख महारानी ​भी थी महाभारत के अनुसार श्रीकृष्ण व रुक्मिणी ने 10 पुत्रों को जन्म दिया था जिनके नाम प्रद्युम्न, चारुदेष्ण, सुदेष्ण, चारुदेह, सुचारू, चरुगुप्त, भद्रचारू, चारुचंद्र, विचारू और चारू था और इन दोनों ने एक पुत्री को भी जन्म दिया था जिसका नाम चारुमति था।

भगवान श्रीकृष्ण और रुक्मणि के चारुमति नाम की पुत्री थाी जिसके बारें में भागवत पुराण में थोडा सा ही बताया गया है। चारुमति के बारे में कोई विशेष रूप से नहीं लिखा गया है लेकिन यह बताया गया है कि लडाई खत्म होने के बाद कृतवर्मा दोबारा पांडवो से मिल गए थे और उनके बेटे बलि से चारूमति का विवाह कराया गया था। परन्तु इसके बारे में पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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