क्या आप जानते हैं कि हम भगवान के आगे अगरबत्ती क्यों जलाते हैं, अगर नहीं तो जरूर पढ़ें ये खबर

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 हमारी हिंदू प्रथा

हमारी हिंदू प्रथाओं के अनुसार हम जब भी किसी धार्मिक स्थान पर जाते हैं या फिर हमारे घर में ही पूजा करते हैं तो हम सबसे पहले अगरबत्ती का इस्तेमाल करते हैं। क्यों कि ऐसा कहा जाता है कि बिना अगरबत्ती या दीपक जलाए हमारी पूजा पूरी नहीं होती है और ना ही हमारी बात भगवान तक पंहुच पाती है। जिससे हमारे मन में एक दम शुद्व विचार आते हैं।

इस बात को सब जानते हैं कि जब हम भगवान के आगे अगरबत्ती जलाते हैं तो अगरबत्ती तो पूरी जल जाती है मगर उसके बाद वहां पर राख ही रह जाती है और हमारा पूरा माहौल एक दम खूशबूदार और पवित्र हो उठता है।

अगरबत्ती हमें यह सीखाने की कोशिश करती है कि इंसानो को दूसरों के हित के लिए यदि स्वंय के हितों को भी त्यागना पड़े तो संकोच नहीं करना चाहिए। आपको बता दें कि अगरबत्ती के उपयोग से कर्इ् प्रकार के रोगों का इलाज किया जाता है ​जैसे की एरोमा थैरेपी। इस थैरेपी में इलाल खुशबू दार अगरबत्ती जलाकर किया जाता हैं

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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