क्या आप जानते हैं, सिर्फ 62 लोगों के पास दुनिया की आधी दौलत!

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दोस्तों, आज हम जो आपको बताने जा रहे हैं उसे जानने के बाद में आप भी हैरान हो जाएंगे । क्योंकि आज पैसो की आवश्यकता हर किसी इंसान को होती है मगर यदि हम आपको बताए कि दुनिया की आधी दौलत सिर्फ 62 लोगों के पास ही हैं और बाकी आधी पूरी दुनिया में तो क्या आप यकीन करेंगे । नहीं ना, मगर यह सच है ।

बताया जा रहा है कि, हाल ही में चैरिटी ऑक्‍सफेम नाम की एक संस्था ने एक शोध कार्य किया जिसमें पाया कि पूंजी होने की असमानता पूरे विश्व में तेजी से बढ़ रही है । इसका सबूत है दुनिया की आधी दौलत केवल 62 लोगों के पास और बाकी की पूरी दुनिया में ।

इस रिपोर्ट के अनुसार बताया जा रहा है कि, साल 2011 मे करीब 388 लोगो के पास पूरे विश्व की आधी संपत्ति थी जो साल 2014 मे सिमट कर केवल 80 लोगों के पास रह गई । मगर साल 2015 में यह दौलत केवल 62 लोगों के पास ही रह गई है। आपको जानकर हैरानी होगी की यह आंकडे लगातार गिरते जा रहे हैं ।

आपको बता दें की विश्व मे संपत्ति की इस असमानता के कारण प्रत्येक 10 मे से एक आदमी रोज रात को भूखा सोता है ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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