क्या आप जानते हैं ऐसी मजार के बारे में, जहां हादसे से बचने को चढ़ती हैं घड़ियां

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आज हम आपको एक ऐसी मजार के बारे में बताने जा रहे है जहां पर लोग हादसे से बचने के लिए मजार में घड़िया चढ़ाते हैं । यह कोई बड़ी मजार नहीं है बल्कि केवल 9 गज की ही मजार है। आपको बता दें कि यह मजार हरियाणा में अंबाला-दिल्ली नेशनल हाइवे पर बनी हुई है ।

यहां पर इसके पीछे दो पुरानी मान्यता हैं । जिसमे एक वर्ग तो यह मानता है कि जिन पीर बाबा की ये मजार है, वह समय के बहुत पाबंद थे। जिसके कारण् ही यहां पर चढ़ावें के रूप में घड़ियां चढ़ाई जाती है।

वास्तव में, यह नौगजा पीर सैयद इब्राहिम बादशाह की मजार है। जो कि इराक से यहां पर आए थे । इसके साथ ही आपको बता दें कि वे एक संत थे और उनका कद करीब 8 गज था । शाहबाद के पास स्थित यह जगह दो कारणों से प्रसिद्ध है। पहला यह कि श्रद्धालु इस मजार पर चढ़ावे में घड़ियां चढ़ाते हैं और दूसरा यह कि यह जगह हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मानी जाती है क्यों कि यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों ही वर्ग के ​लोग आते हैं ।

बताया जाता है कि इस पीर की देखरेख का जिम्मा रेडक्रॉस के पास है। सप्ताह में गुरुवार और रविवार के दिन इस मजार पर मेला भी लगता है।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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