यह चीजें भूलकर भी ना बेचे, नहीं तो आ सकते हैं आपके उल्टे दिन

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हिन्दू धर्म के सभी ग्रन्थ ज्ञान के भंडार है । जिनसे हमें कोई ना कोई ज्ञान प्राप्त होता ही रहता हैं । इन ग्रन्थों का नियमों से अनुसरण करने से मनुष्य सफलता की ऊंचाइयों को छू सकता है ।

1. दवाइयां बेचना: किसी जरूरतमंद या असहाय व्यक्ति को दवाइयां बेचना या उसकी स्थिति का फायदा उठाते हुए पैसे कमाना, भगवान विष्णु की नजरों में अपराध माना जाता है ।

2.नमक का दान: गरीब व्यक्ति को नमक बेचना अपराध है । अगर नमक का दान किया जाए तो यह सबसे उत्तम होता हैं ।

3. मांस बेचना: किसी भी जानवर का मांस बेचना भगवान विष्णु की नजरों में बहुत ही घृणित अपराध है ।

4.भोजन: बना बनाया भोजन बेचना, भूखे व्यक्ति से भोजन के बदले धन लेना, भगवान विष्णु के अनुसार यह बहुत बड़ा पाप है ।

5.गाय का दूध: हिन्दू धर्म में गाय को पवित्र जानवर माना गया है। गाय के दूध को बेचना भगवान विष्णु के अनुसार महापाप है ।

6.सरसो का तेल: विष्णु पुराण के अनुसार धन के लालच में सरसो का तेल भी नहीं बेचा जाना चाहिए।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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