भारतीय चिकित्सा पद्धति को आगे बढ़ाने को मेदांता-आयुर्वेद में साझेदारी

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भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद को आगे बढ़ाने की दिशा में शुक्रवार को देश के दो प्रमुख अस्पतालों ने हाथ मिलाया। मेदांता मेडिसिटी और आयुर्वेद हॉस्पिटल्स ने मिलकर आपसी साझेदारी में मेदांता-आयुर्वेद का शुभारंभ करने की घोषणा की। गुरुग्राम स्थित मेदांता मेडिसिटी में सभी सुविधाओं से सुसज्जित मेदांता-आयुर्वेद के क्लिनिक की शुरुआत की गई है, जिसमें आयुर्वेद के विशेषज्ञ मरीजों को जटिल व असाध्य रोगों से हमेशा के लिए निजात पाने की विधियां बताएंगे।

आयुर्वेद राष्ट्रीय अस्पताल प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएच) से मान्यता प्राप्त भारत का पहला आयुर्वेदिक अस्पताल है जिसने मेदांता के साथ गठजोड़ करके मेदांता-आयुर्वेद की नींव डाली है।

आयुर्वेद अस्पताल के प्रबंध निदेशक और सीईओ राजीव वासुदेवन ने कहा, ” आयुर्वेद के प्रोटोकोल से संचालित आयुर्वेद मेडिकल केयर मुख्य धारा की दो चिकित्सा प्रणालियों- आधुनिक औषधि विज्ञान और आयुर्वेद का मेल है। मेदांता के साथ हमारी साझेदारी से चिकित्सा के क्षेत्र का विकास होगा और उसका लाभ मरीजों को मिलेगा।”

मेदांता के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. नरेश त्रेहन ने कहा, “आयुर्वेद अस्पतालों के साथ मेदांता का गठजोड़ एकीकृत दवाइयों में हमारे विश्वास को मजबूत करता है और यह हमारे व्यवहार में भी है। इसमें अलग-अलग चिकित्सा क्षेत्रों की खासियत है। चिकित्सा के क्षेत्र में इससे अनूठा और प्रभावी समाधान तलाशने में यह एकीकरण कारगर साबित होगा।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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