महापर्व दिवाली: महालक्ष्मी पूजन में स्थान और दिशा का रखें ध्यान, देवी लक्ष्मी होगी प्रसन्न

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दिवाली का पर्व लक्ष्मी गणेश की पूजा का विशेष पर्व माना जाता हैं हिंदू धर्म में इस पर्व का विशेष महत्व होता हैं वही धन वैभव, ऐश्वर्य और सौभाग्य प्राप्ति के लिए दिवाली की रात्रि को महालक्ष्मी गणेश पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता हैं घर, कार्यस्थल पर देवी लक्ष्मी की कृपा बनी रहे। पूजा पाठ का पूर्ण लाभ प्राप्त हो सके इसके लिए आवश्य हैं कि श्रद्धा भक्ति के साथ दिवाली पूजन न केवल सच्चे मन से करें, बल्कि वास्तु के नियमों को भी ध्यान में रखकर सही तरीके से भी पूजा आराधना करें। इससे ध्यान भी केंद्रित होता हैं और पूजा का विशेष फल भी भक्तों को प्राप्त होता हैं वही दिवाली पूजन की तैयारी करते वक्त दिशाओं, रंगों आदि का उचित समन्वय रखना बहुत ही जरूरी माना जाता हैं।

सही दिशा में हो लक्ष्मी पूजन—
सर्वप्रथम तो पूजन कक्ष साफ सुथरा हो, उसकी दीवारें हल्के पीले, गुलाबी, हरे जैसे आधत्मिक रंग की हो तो अच्छा माना जाता हैं क्योंकि ये रंग सकारात्मक शक्ति के स्तर को बढ़ाते हैं काले, नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का प्रयोग पूजा कक्ष की दीवारों पर नहीं होना चाहिए। वास्तुशास्त्र के मुताबिक मानसिक स्पष्टता और प्रज्ञा की दिशा उत्तर पूर्व पूजा करने के लिए आदर्श स्थान हें क्योंकि यह कोण पूर्व एवं उत्तर दिशा के शुभ प्रभावों से युक्त होता हैं घर के इसी क्षेत्र में सत्व ऊर्जा का प्रभाव शत प्रतिशत होता हैं।

वही पूजा करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। उत्तर दिशा धन का क्षेत्र हैं इसलिए यह क्षेत्र यक्ष साधना लक्ष्मी पूजन और श्री गणेश पूजर के लिए आदर्श स्थान माना जाता हैं। मगर ध्यान रहे कि दिवाली पूजन में मिट्टी के लक्ष्मी गणेश की मूर्तियां अथवा चित्र आदि छवियां नई हों। चांदी की मूर्तियों को साफ करके पुन पूजा के काम में लिया जा सकता हैं पूजा कलश व अन्य पूजन सामग्री जैसे की खली बताशा, सिंदूर, गंगाजल, अक्षत, रोली, मोली, फल मिठाई, पान सुपारी, इलाइची आदि उत्तर पूर्व में ही रखा जाना शुभ फलों में वृद्धि करेगा।

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