भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जा सकता : अभिनेत्री एंजेलिना जोली

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हॉलीवुड अभिनेत्री एंजेलिना जोली का कहना है कि भेदभाव किसी तरह से न्यायसंगत नहीं हो सकता है और उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका में लोग ‘सामाजिक ताने-बाने में गहराई से धंसी खामियों को दूर करने के लिए एक साथ आएंगे।’ ‘पीपुल डॉट कॉम’ की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को अपनी 45वीं वर्षगांठ मनाने वाली ऑस्कर विजेता अभिनेत्री ने एनएएसीपी लीगल डिफेंस फंड को 200,000 डॉलर दान किए।

जोली ने कहा, “अधिकार किसी दूसरे को देने के लिए किसी एक समूह से संबंध नहीं रखते। भेदभाव को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता या उचित नहीं ठहराया जा सकता है। मैं आशा करती हूं कि हम अपने सामाजिक ताने-बाने में पैठ बनाए गलतियों को दूर करने के लिए बतौर अमेरिकी एक साथ आ सकते हैं। मैं नस्लीय समानता व सामाजिक न्याय की लड़ाई में एनएएसीपी लीगल डिफेंस फंड के साथ हूं।”

अभिनेत्री ने अपने छह बच्चों मैडॉक्स (18), पैक्स (16), जाहरा (15), शिलोह (14) और 11 वर्षीय जुड़वां नॉक्स और विविएन के साथ अपना जन्मदिन मनाया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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