निर्देशक अभिनय देओ ने कहा, दर्शकों की प्रतिक्रिया सर्वाधिक महत्वपूर्ण

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इरफान खान की ‘ब्लैकमैल’ को अमिताभ बच्चन और अनिल कपूर जैसे दिग्गजों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है, लेकिन फिल्म निर्देशक अभिनय देओ का कहना दर्शकों का निर्णय सर्वोच्च है जो उनके लिए सर्वाधिक महत्व रखता है। फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग में अभिनय के अलावा, कीर्ति कुल्हरि, अरुणोदय सिंह, अनुजा साठे, प्रद्मुम्न सिंह मल और गजराज राव जैसे कलाकार शामिल हुए।

देओ ने कहा, “यह अलग तरह की फिल्म है। हमने कॉमेडी फिल्म में भी कुछ नया करने की कोशिश की है हमें उम्मीद है कि दर्शकों को फिल्म देखने में मजा आएगा, जितना मजा हमें इसे बनाने में आया। इरफान व हमारी फिल्म एक असामान्य यात्रा के लिए तैयार है।”

उन्होंने कहा, “हमें इस फिल्म के लिए एक अविश्वसनीय प्रतिक्रिया मिल रही है, हालांकि दर्शकों की प्रतिक्रिया सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। दोस्त हमेशा अच्छा ही कहेंगे, लेकिन फिल्म रिलीज होने पर शुक्रवार को अंतिम फैसला दर्शकों का होगा और यह मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है।”

यह फिल्म टी-सीरीज के भूषण कुमार और देव के आरडीपी मोशन पिक्च र्स द्वारा निर्मित है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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