दिल्ली-दुर्गापुर की सीधी उड़ान सेवा फिर शुरू हुई !

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एयर इंडिया ने रविवार को करीब दो साल के अंतराल के बाद पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर व दिल्ली के बीच सीधी उड़ान सेवा फिर शुरू की। उड़ान दिल्ली से दुर्गापुर के अंदल हवाईअड्डे पर रविवार सुबह पहुंची और बाद में यह राष्ट्रीय राजधानी को लौटी। विमान में सभी सीटें भरी थीं।

अधिकारी ने कहा, “उड़ान अंदल हवाईअड्डे पर सुबह 7 बजे पहुंची। वापसी की उड़ान एआई-756 122 सीटों वाले एयरबस ए319 विमान ने दुर्गापुर से सुबह 8.25 बजे उड़ान भरी।”

एयर इंडिया ने पहली बार दुर्गापुर के लिए अपनी सेवाएं मई 2015 में शुरू की, लेकिन इसे जून 2016 में वापस ले लिया गया।

एयरलाइन प्राधिकरण ने कहा कि वर्तमान में उड़ानों का परिचालन एक हफ्ते में चार दिन चलेंगी।

केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता बाबुल सुप्रियो ने इस शुरुआत की सराहना की। वह भी विमान में सवार थे। उन्होंने कहा कि टिकट की मांग एयरलाइन व साथ ही साथ हवाईअड्डे के लिए अच्छी खबर है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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