Dinesh Trivedi हुए भाजपा में शामिल, नड्डा बोले, सत्ता को दरकिनार कर गुजारा जीवन

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तृणमूल कांग्रेस छोड़ने के बाद पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी शनिवार को भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा मुख्यालय पर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिनेश त्रिवेदी को पार्टी में शामिल कराया। बीजेपी में शामिल होने को उन्होंने अपने लिए स्वर्णिम पल बताया। दिनेश त्रिवेदी ने बजट सत्र के पहले चरण के दौरान राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफे का एलान किया था। उन्होंने कहा था कि बंगाल की हालत देखकर तृणमूल कांग्रेस में उनका दम घुटता है। इस मौके पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “आज मुझे बहुत खुशी हो रही है कि दिनेश त्रिवेदी को हम भाजपा में शामिल कर रहे हैं। मैं अपनी ओर से, अपने सभी साथियों और करोड़ों कार्यकर्ताओं की तरफ से उनका हार्दिक अभिनंन्दन और स्वागत करता हूं।”

जेपी नड्डा ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस में भ्रष्टाचार, अवसरवादिता, लोकतंत्र की हत्या, संस्थाओं का गला घोंटना, ये सब कुछ विराजमान है। दिनेश त्रिवेदी का एक लंबा राजनीतिक अनुभव रहा है और उन्होंने एक वैचारिक यात्रा राजनीति में की है। सत्ता को दरकिनार करते हुए, विचार की लड़ाई लड़ते हुए उन्होंने अपना जीवन गुजारा है। इसीलिए संवेदनशील और विवेकशील व्यक्तित्व के धनी दिनेश त्रिवेदी ने तृणमूल को छोड़कर आज भाजपा को जॉइन किया है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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