इस साल टेनिस का लौटना मुश्किल : गेब्रियला सबातीनी

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अर्जेंटीना की पूर्व महिला टेनिस खिलाड़ी गेब्रियला सबातीनी का मानना है कि कोरोनावायरस के कारण इस साल टेनिस का फिर से शुरू होना मुश्किल है। सबातीनी ने कहा कि इस खेल की शुरुआत होने से पहले अन्य सभी चीजों पर भी गौर करना चाहिए और फिर अंतर्राष्ट्रीय कलैंडर की शुरूआत करनी चाहिए, जिसकी संभावना 2021 में ज्यादा है।

सबातीनी ने रेड पोस्ट कार्ड सुबिडोस से कहा, ” आगामी महीनों में, मुझे लगता है कि किसी भी खेल टूर्नामेंट का आयोजन होना मुश्किल है। मुझे इस बात में संदेह है कि टेनिस में इस साल कुछ हो सकता है।”

49 साल की सबातीनी 1990 में अमेरिकी ओपन का खिताब जीत चुकी है। इसके अलावा वह अपने करियर में 11 बार बार किसी ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है।

एटीपी और डब्लयूटीए ने घोषणा की है कि जून तक कोई टेनिस टूर्नामेंट नहीं होगा। पिछले सप्ताह ही इस साल होने वाले विंबलडन को रद्द किया गया है। वहीं, फ्रेंच ओपन को मई से बढ़ाकर सितंबर तक के लिए टाल दिया गया है।

सबातीनी ने कहा, ” भविष्य के बारे में सोचना मुश्किल है कि क्या होगा। अच्छी बात यह है कि हम सब इस परेशानी कोरोना को झेल रहे हैं क्योंकि यह एक वैश्विक बीमारी है। इसलिए यह जरूरी है कि हम सब घर पर ही रहें और सुरक्षित रहें।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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