गायिका आकृति कक्कड़ ने गाया भक्ति गीत

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गायिका आकृति कक्कड़ ने ‘ओम गजानन सिद्धिविनायक’ भक्ति गीत को अपनी आवाज दी है। इस गीत को इस माह के अंत में गणेश चतुर्थी के अवसर पर लांच किया जाएगा। उन्होंने इस गीत को अपने बैंड को समर्पित किया है।

पिछले दो साल से आकृति अपने घर में गणपति की स्थापना करती आई हैं। इस समय उन्होंने कुछ खास करने का सोचा है।

आकृति ने एक बयान में कहा, “मैं इस साल भी स्थापना करना चाहती थी, लेकिन पेशेवर प्रतिबिद्धिताओं के कारण मैं बेहद व्यस्त हूं। यह साल मेरे लिए खास है, क्योंकि मैं गणेश चतुर्थी अपने पति चिराग के साथ घर पर मनाऊंगी और मैं कुछ खास करना चाहती थी।”

आकृति ने कहा, “मैं इस गीत को अपने बैंड को समर्पित करना चाहती हूं, जो उतार-चढ़ाव के समय पर मेरे साथ रहा। हम बप्पा की बदौलत यहां तक पहुंचे हैं।”

इस गीत को आकृति के बैंड में शामिल अनीत हदकर ने संगीत दिया है, वहीं इसके सुर बैंड के एक अन्य साथी सत्यजीत जमशेदकर ने दिए हैं। इस वीडियो को चिराग अरोड़ा ने निर्देशित किया है और रेशमा जमशेदकर ने इसे कोरियोग्राफ किया है। जी म्यूजिक, एके प्रोजेक्ट्स और वन डिजिटल एंटरटेनमेंट द्वारा इस गीत को लांच किया जाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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