Dev uthani ekadashi 2020: देवउठनी एकादशी पर क्यों तुलसी संग होता है श्री विष्णु का विवाह, जानिए

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हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को विशेष महत्व दिया जाता हैं। जिस देवउठनी एकादशी कहा जाता हैं इस एकादशी पर ही भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा के बाद जागते हैं और सृष्टि के संचालन का भार दोबारा से ग्रहण करते हैं यह एकादशी हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की तिथि पर मनाई जाती हैं इस बार देवउठनी एकादशी 25 नवंबर को पड़ रही हैं। इस दिन से चतुर्मास समाप्त हो जाता हैं और एक बार फिर से शादी विवाह और धार्मिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं।

भगवान श्री विष्णु के चार मास के लिए नि​द्रा में जाने के पीछे एक कथा प्रचलित हैं जिसके अनुसार एक बार श्री विष्णु से उनकी प्रिया लक्ष्मी ने आग्रह भाव में कहा हे प्रभु आप दिन रात जागते हैं मगर जब आप सोते हैं तो फिर कई सालों के लिए सो जाते हैं ऐसे में सभी प्रकृति का संतुलन बिगड़ जाता हैं इसलिए आप नियम से ही विश्राम किया कीजिए। आपके ऐसा करने से मुझ भी कुछ समय आराम मिलेगा। लक्ष्मी की बात सुनकर नारायण मुस्कुराए और बोले— तुमने उचित कहा है। मेरे जागने से सभी देवों और खासकर तुम्हें मेरी सेवा में रहने के कारण विश्राम नहीं मिलता हैं इसलिए आज से मैं हर साल चार मास वर्षा ऋतु में शयन किया करूंगा। मेरी यह निद्रा अल्पनिद्रा और योगनिद्रा कहलाएगी। जो मेरे भक्तों के लिए परम मंगलकारी रहेगी। इस दौरान जो भी भक्त मेरे शयन की भावना कर मेरी सेवा करेंगे, तो मै उनके घर तुम्हारे सहित हमेशा निवास करूंगा।

इस दिन तुलसी विवाह इसलिए होता हैं क्योंकि भगवान विष्णु तुलसी को आशीर्वाद दिया था कि उनके शालीग्राम रूप संग तुलसी जी का ​शुभ विवाह कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी के दिन किया जाएगा।

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