Ghazipur border, पर प्रदर्शन जारी, प्रदर्शनस्थल पर अपने दादा से मिलने पहुंचे मासूम बच्चे

0

कृषि कानूनों के विरोध में 7 दिन से दिल्ली-हरियाणा और गाजीपुर बॉर्डर पर किसान अपना आंदोलन कर रहे हैं। इस आंदोलन में काफी बुजुर्ग भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिए हुए हैं। ऐसे में गाजीपुर बॉर्डर एक 65 वर्षीय बुजुर्ग सुरेंद्र सिंह से उनके भतीजे के बच्चे मिलने प्रदर्शनस्थल पर पहुंच गए। बच्चों का कहना है कि, “बीते हफ्ते भर से अपने दादा से नहीं मिले थे। वहीं उनकी याद आ रही थी, इसलिए हम बुलंदशहर से यहां आ गए हैं। साथ ही हमारे पापा भी थोड़ी देर में यही आ रहे हैं।”

दरअसल गाजीपुर बॉर्डर पर हिमानी, हनी और यश बुलंदशहर के अनेडा गांव से आए हैं, तीनों फिलहाल सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं। बीते हफ्ते भर से बच्चों के दादा किसानों के प्रदर्शन में शामिल हैं। जिसके कारण वह घर नहीं जा सके। वहीं जब बच्चों को दादा की याद आने लगी तो परिजनों के साथ प्रदर्शन स्थल पर ही आ गए।

वहीं दूसरी ओर किसान भी बॉर्डर पर अपनी मांगों को लेकर बैठे हुए हैं। बीते मंगलवार को किसानों को मनाने की सरकार की कोशिश भी नाकाम रही।

नयूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleSpy Universe: बॉलीवुड के इतिहास में पहली बार, एक साथ नजर आएंगे सलमान, शाहरूख, ऋतिक, दीपिका और कैटरीना
Next articleदिसंबर में दस्तक देने वाली है ये दमदार वेब सीरिज़, अब होगा मनोरंजन का डबल धमाका
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here