राहुल के बिना सीडब्ल्यूसी बैठक शुरू, दिल्ली हिंसा के मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई

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कांग्रेस की अंतरिम प्रमुख सोनिया गांधी की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्यकारिणी समिति (सीडब्ल्यूसी) की महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को यहां राहुल गांधी के बिना शुरू हुई। नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर 23 फरवरी से दिल्ली में हुई हिंसक झड़पों में जान गंवाने वाले सभी लोगों की याद में पार्टी के नेताओं ने दो मिनट का मौन रखा।

रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट किया, “सीडब्ल्यूसी ने उन लोगों की याद में मौन रखा, जिन्होंने दिल्ली हिंसा में अपना जीवन गंवा दिया।”

पार्टी सांप्रदायिक सद्भाव को उजागर करते हुए ‘सद्भावना मार्च’ निकालेगी। यह 30 जनवरी मार्ग तक जाएगी जहां महात्मा गांधी शहीद हुए थे।

कांग्रेस ने मंगलवार को शांति की अपील की और कहा कि हर कांग्रेस कार्यकर्ता यहां शांति बनाए रखने में मदद करेगा। चार दिनों में हिंसा में मरने वालों की संख्या 18 हो गई है। सीडब्ल्यूसी के दिल्ली हिंसा पर एक विस्तृत बयान जारी करने की संभावना है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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