दिल्ली: थप्पड़ मारने से नाराज इकलौते बेटे ने सुपारी देकर कराई बिजनेसमैन पिता की हत्या

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हाल ही में, पुलिस ने दिल्ली में केमिकल कोराबारी की हत्या का मामला सुलझा लिया हैं इस मामले में पुलिस ने बताया है कि कोराबारी की हत्या उसके ही बेटे ने की है। दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने आरोपी बेटे और उसके सभी साथियों को पकड़ लिया है। पुलिस ने बताया है कि इसने अपने पिता की हत्या के लिए सुपारी दी थी ।

पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी के पिता उसकी गलत संगतो से काफी परेशान रहते थे जिसके चलते उसको खर्चे के लिए पैसे भी नहीं दिए जाते थे । इस कारण उसने पिता की हत्या करा दी। इसके आगे पुलिस ने बताया है कि कारोबारी अनिल खेरा की हत्या उस समय की गई जब वह अपने कारोबार के सिलसिले में बाहन गए हुए थे । बाइक पर सवार कातिलों ने उन्हें नजदीक से कई गोलियां मारी थीं। इस काम के लिए अनिल खेरा के बेटे ने दो लोगों को करीब 5 लाख रूपए की सुपारी दी थी ।

इसके आगे पुलिस ने बताया है कि जब आरोपी ने उन बदमाशों को सुपारी के पैसे नहीं दिए तो उनमें झगडा होने लगा । और बाकी आरोपियों ने गौरव की पूरी जानकारी पुलिस को दे दी । इसके आगे पुलिस ने बताया है कि गौरव को जुआ खेलने की आदत थी जिसके कारण एक दिन उसके पिता ने उसकी पिटाई कर दी और गौरव ने गुस्से में आकर इस खतरनाक काम को अंजाम दिया ।


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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