दिल्ली : सिग्नेचर ब्रिज जनता के लिए खुला

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बहुप्रतीक्षित यमुना नदी पर निर्मित सिग्नेचर ब्रिज को सोमवार सुबह आम जनता के लिए खोल दिया गया। सिग्नेचर ब्रिज के उद्घाटन के एक दिन बाद इसे लोगों के लिए खोला गया है।

यह पुल नदी पार वजीराबाद को जोड़ता है और इससे उत्तर व उत्तरपूर्वी भाग के बीच 45 मिनट के सफर में अब सिर्फ 10 मिनट लगेंगे। इससे मौजूदा वजीराबाद पुल पर यातायात के दबाव में भी कमी आएगी।

एक सरकारी अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, “पुल को सुबह यातायात पुलिस को सौंप दिया गया और पुल पर यातायात की इजाजत दे दी गई।”

सरकार ने इसे देश का पहला एसिट्रिकल केबल स्टे ब्रिज होने का दावा किया है। इस पुल के जरिए लोगों को 154 मीटर ऊंचे निगरानी डेक से शहर के विहंगम दृश्य का आनंद उठाने को मिलेगा।

इस 557 मीटर लंबे सस्पेंशन ब्रिज को 2004 में प्रस्तावित किया गया था और इसे दिल्ली सरकार ने 2007 में मंजूरी दी। इस पुल का उद्घाटन रविवार को आप व भाजपा कार्यकर्ताओं के झड़प के बीच हुआ।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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