Delhi Night Curfew : 8 बजे से ही बंद होने लगीं दुकानें, स्टाफ की नौकरी पर भी खतरा

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दिल्ली में मंगलवार से 30 अप्रैल तक रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक इस साल का पहला नाइट कर्फ्यू लगाया गया। दिल्ली का दिल कहे जाने वाले कनॉट पैलेस स्थित दुकानें बुधवार को 8 बजे से ही बंद होने लगीं। स्टाफ का घर दूर होने की वजह से भी दुकान संचालकों को ये कदम उठाना पड़ रहा है। वहीं कुछ कर्मचारियों की नौकरी पर भी खतरा मंडराने लगा है। कनॉट प्लेस स्थित हल्दीराम के मैनेजर रमेश शर्मा ने आईएएनएस को बताया, “मंगलवार को नाइट कर्फ्यू का पहला दिन था, घर के लिए निकलने में देर हो गई। मुझे चांदनी चौक पर पुलिसकर्मियों ने रोक लिया और आगे से रात में जल्दी घर पहुंचने के लिए कहा।”

शर्मा ने बताया, “हम अपनी दुकान अब रात 9 बजे ही बंद कर देते हैं, ताकि स्टाफ जल्दी अपने घर पहुंच सकें। हालांकि अभी तक किसी स्टाफ ने जल्दी छोड़ने की गुजारिश की है, क्योंकि सभी आस-पास ही रहते हैं।”

कनॉट प्लेस स्थित स्नो व्हाइट दुकान के मैनेजर सुनील दत्त ने आईएएनएस को बताया, “हमारी दुकान पर 90 कर्मचारी हैं, सभी की समस्या को देखते हुए हम साढ़े 8 बजे ही दुकान बंद करना शुरू कर देते हैं। हालांकि जो लड़कियां हैं, उनको हम 8 बजे ही छोड़ दे रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “दिल्ली मेट्रो को भी इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि 10 बजे आखिरी एंट्री रखोगे तो लोग अपने घर कब पहुंचेंगे, उन्हें इस कम कर 9 बजे आखिरी एंट्री करनी चाहिए, ताकि व्यक्ति घर अपने समय से पहुंच सके और नियमों का पालन कर सकें।”

हालांकि कुछ कर्मचारी ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपने मालिकों आए साढ़े 7 बजे ही दुकान से घर जाने के लिए कह दिया है।

कनॉट प्लेस की एक दुकान में कार्यकर्त कर्मचारी राजू ने आईएएनएस को बताया, “मैं पहले एक घंटे में घर पहुंचता था, लेकिन मंगलवार को जाम के कारण मुझे 2 घंटे से भी अधिक समय लग गया। नाइट कर्फ्यू के कारण मुझे पुलिसकर्मियों ने दो से तीन बार रोका, जिसकी वजह से मुझे काफी दिक्कत हुआ।”

उन्होंने कहा, “कल का अनुभव देख मैंने अपने मालिक से कहा है कि मुझे साढ़े 7 बजे तक दुकान से चले जाने दें।”

नाइट कर्फ्यू के कारण देर रात तक चलने वाले रेस्तरां और कैफे के व्यापार पर भी असर पड़ने लगा है। इतना ही नहीं, कैफे में काम करने वाले कर्मचारियों की नौकरी जाने के संकट मंडराने लगे हैं।

कनॉट प्लेस वेयर हाउस कैफे के मैनेजर अमित कुमार ढींगरा ने आईएएनएस को बताया, “हम नाइट कर्फ्यू के चलते 9 बजे ही बंद करना शुरू कर देते हैं। हमारे कैफे में करीब 20 कर्मचारी हैं। व्यापार पहले से ही घाटे में चल रहा था, अब फिर इस तरह के कदम उठाए जाने से व्यापार और प्रभावित हो गया है।”

उन्होंने कहा, “हमारे साथ काम करने वाले कर्मचारियों से हम बात कर रहे हैं और इस पर मैनेजमेंट भी संपर्क बनाए हुए है। हमने वैसे एक दिन छोड़ एक स्टाफ को आने के लिए कहा है, यानी 15-15 दिन स्टाफ के काम करने पर बात की जा रही है। हालांकि तनख्वाह पूरी मिलेगी या नहीं मिलेगी, इस पर मैं कुछ नहीं कह सकता।”

इसी कैफे में कार्यरत एक व्यक्ति ने बताया, “कुछ कर्मचारियों को छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया है। हालांकि इस बात की पुष्टि मैनेजर ने नहीं की।”

कनॉट प्लेस की एसोसिएशन न्यू दिल्ली ट्रेडर्स एसोसिएशन के एक्सिक्यूटिव मैम्बर अमित गुप्ता ने बताया, “नाइट कर्फ्यू में ट्रेडर्स के हाथ मव ज्यादा ताकत नहीं है। 10 बजे बंद होना है तो होना है, इसका मतलब साढ़े 8 बजे से आपको बंद करना होगा, ताकि लोग और कर्मचारी भी अपने घर पहुंच सकें।”

“नाइट कर्फ्यू के अलावा दिन में भी सरकार को कनॉट प्लेस में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने पड़ेंगे, ताकि कोरोना का खतरा न रहे जैसे की सड़कों पर अवैध रूप से बैठने वाले हॉकर्स पर सख्त कदम उठाया जाए, वहीं चालान करने वाले लोगों की भी संख्या बढ़ाई जाए।”

“हमें अपने कर्मचारियों के साथ ऐसे वक्त में तालमेल करना पड़ेगा, इसको लेकर भी हमने चर्चा की है। एसोसिएशन अपनव सदस्यों को सहयोग करने की कह रहे हैं। हम नहीं चाहते कि किसी कर्मचारी की नौकरी जाए, इसलिए जितना सहयोग हो मालिक करें।”

न्यूज स़ोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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