Farmers Protest 100 Days: बर्बादी की तरफ जा रहा आंदोलन, क्या किसान बन गए आपसी दुश्मन?

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कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसानों के आंदोलन को दिल्ली बॉर्डर पर 100 दिन पूरे हो चुके हैं। किसानों के नाम पर शुरू हुए इस हठन ने हरियाणा की इंडस्ट्री को बर्बादी की कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। सबसे ज्यादा रोजगार देने वाला टेक्सटाइल सेक्टर आंसू बहा रहा है। देश में डर के माहौल के कारण व्यापारी पानीपत नहीं आए हैं। ट्रांसपोर्टरों ने सप्लाई नहीं की है। कई फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। इस कारण सोनीपत से हजारों कामगार पलायन कर गए हैं।

इंड्रस्ट्री ही क्यों जिन किसानों के नाम पर आंदोलन चल रहा है उन किसानों का भी भला होता नजर नहीं आ रहा है। उन्हें अपनी सब्जी की फसल खेत में ही तबाह करनी पड़ रही है। आंदोलन में हिस्सेदार बने किसान खेतों में खड़ी फसलों को बेच नहीं पा रहे हैं। कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर 100 दिन से चल रहे आंदोलन के कारण हालात क्या बन गए हैं।

  1. फैक्टिरियों में काम करने वालों का कहना है कि आंदोलन के कारण रास्ता बंद है और फैक्ट्री तक आने-जाने की भी परेशानी है।
  2. कुरुक्षेत्र धर्मनगरी कुरुक्षेत्र जीटी बेल्ट पर टूरिज्म का बड़ा स्पाट है। पर किसान आंदोलन ने इसको भी प्रभावित किया है।
  3. जो फैक्ट्रियां मार्च तक पूरे उत्पादन के साथ चलती थी, वो फरवरी आते-आते बंद होने लगीं।
  4. 80 ट्रक रोजाना निकलते थे किसान आंदोलन से पहले यमुनानगर से।
  5. 30 ट्रक ही अब दिल्ली पहुंच पा रहे हैं किसान आंदोलन के बाद से।

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